The nation is remembering the great legendary personality of the country, Sarojini Naidu, born on February 13, 1879, in Hyderabad. She was a political activist, feminist, celebrated poet, and playwright. She joined politics, advocating for women’s rights, education, and Hindu-Muslim unity. She was the first Indian woman to be president of the Indian National Congress in 1925. She participated in the Non-Cooperation Movement, Salt March, and Quit India Movement. She served as a member of the Constituent Assembly. After Independence, she was appointed Governor of United Provinces (Uttar Pradesh) from 1947-1949. She was called “the Nightingale of India” by the Father of the Nation, Mahatma Gandhi.
[Read more…] about NIGHTINGALE OF INDIA AND THE MOUNTAINSकंगाली में घी पीने की क़वायद
आर्थिक संकट में हिमाचल सरकार के
नवाबी शौक!
हाल ही में हिमाचल के वित्त सचिव का ख़ुलासा कि ‘प्रदेश घोर आर्थिक संकट से गुज़र रहा है’, इस मुद्दे ने हर जगह एक बहस छेड़ दी है। हिमाचल के इतिहास में पहली दफ़ा हुआ जब एक उच्च अधिकारी ने वित्तीय संकट का ख़ुलासा किया। चाय से लेकर नाई की दुकान, कार्यालयों व राजनैतिक गलियारों तक सब इस मुद्दे पर चर्चा करते नज़र आ रहे हैं। जब सरकार राज्य की इस स्थिति से वाक़िफ़ थी तो वित्त सचिव की प्रेजेन्टेशन हास्यास्पद लगती है। राज्य की सरकार व सरकारी अमरबेलें आर्थिक स्थिति जानते हुए भी अपनी मौजमस्ती के लिए क़र्ज़ लेकर घी पीती रही हैं। सभी प्रदेशवासी सच्चाई जानते हैं लेकिन यहां के भोले भाले लोग कुछ बोलते नहीं हैं। तीन साल से सरकारी ख़ज़ाने पर ऐश कर रही सरकार व उनके मित्र-मंडली के अब जनता के सामने घड़ियाली आँसू क्यों निकले, यह विचारणीय प्रश्न है? मीडिया में दिए जा रहे बयानों से अभी आम जन-मानस को डराकर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि सैलरी, पेंशन व डी ए बंद हो जाएगा। रोज़गार नहीं मिलेगा। लेकिन लोकतंत्र के राजाओं ; नेताओं व अधिकारियों की मिलीभगत से उनकी ऐश यथावत बनी रहेगी।
[Read more…] about कंगाली में घी पीने की क़वायदशिमला काफ़ी हाउस का भागीरथ
शिमला ने अंग्रेज़ों से लेकर आज तक इतिहास को बनते व बदलते देखा है । यहां का मालरोड इसका गवाह व साक्षी रहा है। अंग्रेज़ों के ज़माने से माल पर चहलक़दमी करना और यहाँ के रेस्टोरेंट में बैठना और बतियाना शिमला शहर की संस्कृति व परम्परा का अहम हिस्सा रहा है ।हाल ही के वर्षों में शिमला के माल रोड का परिदृश्य तो कुछ बदला है लेकिन यहां के निवासियों का टहलना व रेस्टोरेंट में बैठना बिलकुल भी बदला नहीं है। नौकरी पेशे बाले तो अमूमन शाम को ही रेस्टोरेंट में बैठना पसंद करते हैं लेकिन हाल ही के वर्षों में शिमला रिटायर कर्मियों का शहर बन गया है । बालजीज रेस्टोरेंट के बंद होने के बाद सभी के मिलने का अड्डा शिमला का एल्फा , आशियाना या कॉफ़ी हाउस ही है। कॉफ़ी हाउस की सबसे बड़ी ख़ूबी है ,इसने शिमला वासियों व जनपद के निवासियों को वर्ष 1957 से कॉफ़ी का स्वाद चखाया ही नहीं बल्कि ये उनका पसंदीदा पेय बन गया वही संवाद का मुख्य केंद्र भी बना। रोज़ माल पर घूमने वालों में काफ़ी की लत इस कदर है कि कुछ वक़्त माल पर टहलने के बाद कदम काफ़ी हाउस की ओर स्वयं ही उठाते हैं।
[Read more…] about शिमला काफ़ी हाउस का भागीरथTHE FORGOTTEN PRINCESS OF “QUEEN OF HILLS”
The nation is today celebrating the birth anniversary of a great lady who dedicated her life for the freedom of the country and nation building. Born on February 2, 1889, to the royal family of Kapurthala, Rajkumari Amrit Kaur, the Princess of Kapurthala, had her early education in Sherborne School for Girls in Dorset, England, and her college education at Oxford University. She was raised a Christian. She had a landed property, “Manorville “in Summerhill, Simla (Shimla).
[Read more…] about THE FORGOTTEN PRINCESS OF “QUEEN OF HILLS”Simla Mourns Gandhi’s Assassination
On January 30, 1948, Shimla was stunned to hear the shocking news of Mahatma Gandhi’s assassination in Delhi. Immediately, shops and markets were closed, and the entire town plunged into darkness. The Tribune reported: ‘Groups of people in tears were seen standing on the roadside, bemoaning the irreparable loss that India had suffered at this critical stage of history.’ The town observed a three-day mourning period.
[Read more…] about Simla Mourns Gandhi’s Assassinationसरदार पटेल का पत्र व डॉ परमार के अथक प्रयासों से हिमाचल देश का 18 वाँ राज्य बना ।
हिमालय क्षेत्र में छोटी-छोटी रियासतों में बँटे इस भूभाग को एकत्रित कर हिमाचल का उदय आज़ादी के आठ माह उपरांत 15 अप्रैल 1948 को हुआ। एक नवंबर ,1966 में हिमाचल प्रदेश में पंजाब के पहाड़ी क्षेत्रों के विलय से विशाल हिमाचल बना।तदोपरांत डॉ. यशवंत सिंह परमार के नेतृत्व में राज्य को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलवाने के लिए एक संघर्ष आरंभ हुआ । पाँच जुलाई 1965 को कांग्रेस कार्यकारी समिति ने एक प्रस्ताव पास कर प्रदेश को संवैधानिक दर्जा ,लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल द्वारा 18 मार्च 1948 में लिखें पत्र का हवाला देते हुए पारित किया ,जिसमें सरदार पटेल ने लिखा था की – “अपने अंतिम चरण में जब यह क्षेत्र अपने संसाधनों तथा प्रशासनिक प्रशासनिक तौर पर पूरी तरह से विकसित हो जाएगा तो यह संवैधानिक तौर पर देश के अन्य राज्यों के समान होगा। “ सरदार वल्लभभाई पटेल का यह कथन हिमाचल को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का आधार बना । वहीं नेहरु-गांधी परिवार की विशेष अनुकंपा ने भी अहम योगदान दिया।
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